कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0221

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कुछ रिश्ते ....सिर्फ "शब्द" ही बोते हैं

कुछ रिश्ते ....सिर्फ "शब्द" ही बोते हैं और दरमियाँ .... सिर्फ शब्द ही शब्द होते हैं अदृश्य सी ....डोर से बंधे हुए जैसे .... मैं .....और .....आप और हमारे दरमियाँ .... शब्दों का अम्बार बीच कोई नहीं हमारे सिर्फ शब्द .... और इक सोच .... जुड़े रहने की बस शब्दों की गोंद से शब्दों के मलहम से कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें