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रचना 0215

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लफ़्ज़ों की बंदिशें ..... दरमियाँ

लफ़्ज़ों की बंदिशें ..... दरमियाँ आज रहने दो .... आज .... आँखों से तुम्हारा भ्रम .... जीने की हूक उठी है कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें