कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0211

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अल्फ़ाज़ का समुंदर

अल्फ़ाज़ का समुंदर ....... लहरों को नाम मिटाते हुए देखा .... हर एहसास को बहाते हुए देखा ..... मैंने रचा ....अल्फ़ाज़ का समुंदर खुद का समुंदर ..... मुझ सा समुंदर ..... लफ़्ज़ों में डोलती हूँ एहसास बांधती खोलती हूँ क्षितिज मेरा ......रेत मेरी जल भी मेरा .....साहिल मेरा नित नयी कल्पना शब्दों की हूँ अल्पना मिटती नहीं मिटाये रोज़ तूफ़ान आये अपने लफ़्ज़ों को भिगोती हूँ खुद को ....आप में डुबोती हूँ बस जो रह जाता है .....लिखा हुआ रख देती हूँ ......सजा हुआ अलफ़ाज़ का समुंदर .......अनंत मैं ....."कल्पना" .... भी तो अनंत कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें