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रचना 0209

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मेरे जुगनू .......तो अब तलक

मेरे जुगनू .......तो अब तलक मुठ्ठी में बंद हैं फिर ....कौन ? अर्श पर .....तुम्हारा नाम लिख गया खुश्बू .....तुम्हारी थी मेरे सिरहाने रख गया
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें