कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0202

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मेरे पास

मेरे पास ..... दो आईने हैं ..... इक वो .....जिसे "मैं "देखती हूँ .... पर कभी कभार ......दिखती हूँ और इक तुम .... जिसमें "सिर्फ मैं" दिखती हूँ हर बार .....जो मैं दिखना चाहती हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें