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ज्ञान ज्योति का दीपक जलाये

ज्ञान ज्योति का दीपक जलाये ..... मन में आशा का सागर समाये हिंदी प्यारी हमारी है भाषा इसको उन्नत बनाने की आशा बढ़ती आयी है बढ़ती रहेगी नाम भारत का रोशन करेगी माँ के माथे की जैसे हो बिंदी झिलमिलाएगी एक दिन ये हिंदी गांधी नेहरू ने देखा था सपना राष्ट्रभाषा बने मान अपना हिंदी बोलेंगे हिंदी पढ़ेंगे आओ मिलके ये प्रण हम करेंगे ज्ञान ज्योति का दीपक जलाये ......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें