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रचना 0187

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असमानी हर्फ़..... तुम

असमानी हर्फ़..... तुम बेहिसाब लफ्ज़ ....हम एहसास जुगनू ......तुम कलम रोशनाई .....हम इबारतें ......तमाम रात लिखते रहे तुम पर बांवरा चाँद .....तुम ठहरते ख्वाब ...हम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें