कल रात.... चाँद को ......आँखों में तैरते देखा कौन कहता है .... ख्वाइशें ......छुई नहीं जाती देखो ..... छू के आ रहे हैं क़तरा क़तरा...... चाँद लकीरों में पा रहे हैं