भाषा / Language
खामोश आँखों से बस
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खामोश आँखों से बस .....
देखा उन्हें जाते हुए
हर अरज़ ....हर उमींद
फर्श से उठाते हुए
इक बार फिर
खुद को समझाते हुए
हमने लम्हों को अलविदा किया
बे लफ्ज़ होकर
इस बार कहीं ज्यादा .......
बेबस हो कर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें