इक सिरा ख़्वाबों का भींचे बैठी हूँ इस पार..... दूसरा सिरा अब भी तलाश रहा तुम्हें उस पार......
रचना 018120 अगस्त 2015भाषा / Languageहिन्दीEnglishइक सिरा ख़्वाबों का✦इक सिरा ख़्वाबों का भींचे बैठी हूँ इस पार..... दूसरा सिरा अब भी तलाश रहा तुम्हें उस पार......कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें