तुम्हारी तलब के ......औंधे पड़े पैमाने क्या छू बैठे ...... बेनूर कलम भी ......सुर्ख एहसास पिरोने लगी
रचना 017615 जुलाई 2015भाषा / Languageहिन्दीEnglishतुम्हारी तलब के ......औंधे पड़े पैमाने✦तुम्हारी तलब के ......औंधे पड़े पैमाने क्या छू बैठे ...... बेनूर कलम भी ......सुर्ख एहसास पिरोने लगीकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें