भाषा / Language
माँ
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माँ........
अंश जब मेरा तुझमें आया ....
मन तेरा भी हर्षाया था ना .....माँ
बेटी की आस में ....
कई बार हाथ फैलाया था ना ....माँ
रुई से हाथों से ....
मुझे " यूँ "फक्र से उठाया था ना .....माँ
किलकारी भरे आँचल में ....
मुझे भी छिपाया था ना ......माँ
अपनी लोरी में हर रात .....
इक नयी परी को बुलाया था ना ......माँ
पहली नज़र में मुझे ....
अपना सब कुछ बनाया था ना ......माँ
गोद में मुझे उठाकर .....
खुद को पूर्ण पाया था ना .....माँ
मुझे तू मिली .....
तमगा ममता का तुझे भाया था ना .....माँ
बेटी सुनकर खुद को .....
किस्मत वाली बुलाया था ना .....माँ
अपनी परछाई को थामे ....
मन इतराया था ना .....माँ
रुनझुन छुन छुन मैं चली .....
ठुमका तूने भी लगाया था ना ......माँ
तुतलाती मेरी बातें सुन .....
गला तेरा भी भर आया था ना .....माँ
हर कहानी में अपनी ....
मुझे राजकुमारी बनाया था ना.....माँ
हर चोट को मेरी .....
आंसू से धुलाया था ना ......माँ
गिर गिर के उठना .....
हर रोज़ सिखाया था ना .....माँ
मेरी नादानियों में .....
चुप्पी का चांटा लगाया था ना .....माँ
संस्कारों में लिपटे रहना.....
रटाया था ना .....माँ
ख्वाइशों को मेरी.....
पोंछ कर नया बनाया था ना.....माँ
कोशिशों में दरारें गिना .....
मुझे बेहतर बनाया था ना ......माँ
मेरे शौक को अपना बता.....
आँखों में सजाया था ना .....माँ
मेरी नाकामी को....
वार कर फिकवाया था ना .....माँ
मेरी ज़िन्दगी में .....
दुआओं का पौंधा लगाया था ना .....माँ
मेरे हर रूप में .....
अपना प्रतिरूप पाया था ना .....माँ
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें