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रचना 0165

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तमन्नाओं का ज़ख़्मी हूँ

तमन्नाओं का ज़ख़्मी हूँ ..... या ज़ख्मों की तमन्ना है...... एक सा .....है पर एक सा ......है तो नहीं बस .... मुहब्बत है दरमियान
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें