कल्पनाशब्दों के बीच
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Behad khubsurat pic ko dekhkar kuch ye likha aaj . Yogendra…

Behad khubsurat pic ko dekhkar kuch ye likha aaj . Yogendra Kulbhushan Singh thank u for sharing this . ख्वाइशों का क्या है ...... ये तो असीम है सागर में उठने वाली असंख्य लहरें कह लो इन ख्वाइशों को उजास देने वाले तुम हो .... मन तुम्हें सूरज कह दूं ? जैसे सूरज तपिश कहते कहते .... सुनेहरापन उजलापन लीप देता है सब पर तुम भी क्या कम सूरज हो ....मन ? तन से लेकर मन पर दिल से लेकर दिमाग पर मेरी ख्वाइशों को सेक देने वाले सुबह से लेकर साँझ तक दिन से लेकर रात तक सुनहरा हो जाने तक संग रहने वाले मन ..... तुम्हें सूरज कह दूं ? बेहद रूमानी है ये जोड़ा सूरज .... समुंदर का मन और ख्वाइश का उगने ... डूबने वाला डूब कर ....उगने वाला सुनहरी .....सेक वाला रोज़ नयी ....उल्लास वाला
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें