कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0158

भाषा / Language

मेरी लेखनी

मेरी लेखनी..... बहुत देर से मैं ...... बैठी हूँ एक ख़याल के साथ अल्फ़ाज़ों को पहन उतार कर देखती हुई लफ़्ज़ों के पर्याय ढूंढ़ती हुई शब्दों को धोकर पोछती हुई मिसरा बदल कर बिछाती हुई एहसास तेह लगाती हुई काफ़िया कतार में सजाती हुई लय कभी बहर उधार लाती हुई ख़याल से बोरियत मिटाती हुई विचारों की पुनरावृति घटाती हुई भारी को हल्का कराती हुई अतिश्योक्ति कर हंसाती हुई शेरो में दिल बसाती हुई इत्तू इत्तू शब्द घुसाती हुई अनेकार्थी शब्द भिड़ाती हुई बदरंग कोशिश में रंग भरती हुई आम बात नए लिबास में पेश करती हुई मिलते जुलते शब्दों की बंदिश करती हुई उर्दू के शब्दों से खूबसूरती गढ़ती हुई पर हर बार कल्पना का स्पर्श कराती हुई मैं लिखती हूँ ....... अपने ख़याल को कागज़ पे खड़ा करती हूँ आपकी नज़र करती हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें