भाषा / Language
जस्न
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जस्न ......
अजी !बड़े झूठे हो ....
कहते हो की अकेले हो
इस अकेलेपन को कहो .....
कसक ,
पीड़ा ,
दुःख ,
तकलीफ ,
तड़प
और दर्द
सभी को ले आये
आज रात इनके ही साथ "जस्न "हो जाये
एक जाम ज़िन्दगी के नाम हो जाये
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें