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रचना 0148

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जस्न

जस्न ...... अजी !बड़े झूठे हो .... कहते हो की अकेले हो इस अकेलेपन को कहो ..... कसक , पीड़ा , दुःख , तकलीफ , तड़प और दर्द सभी को ले आये आज रात इनके ही साथ "जस्न "हो जाये एक जाम ज़िन्दगी के नाम हो जाये
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें