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रचना 0134

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तुम्हारा नंगे पाँव

तुम्हारा नंगे पाँव साहिल को छूना और इक जोड़ा पैरों की मोहर मेरे सेहरा की तरफ चली आना ये प्रेम तो नहीं हो सकता …है ना ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें