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रचना 0126

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परिंदो से दोस्ती , ख्वाब का शजर हो

परिंदो से दोस्ती , ख्वाब का शजर हो सूरज लक्ष्य , आसमान पर नज़र हो बुलंदी पूछती फिरेगी तेरा पता ढेर सा जतन , बस थोडा सा सबर हो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें