कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0107

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होली में

होली में .... आओ थोडा द्वेष धुला लो होली में मल मल सारा क्लेश धुला लो होली में पिचकारी में जीवन भर लो होली में ख्वाबों की बौछार लगालो होली में खुशियों का टीका लगवा लो होली में मांग सुकून पिया से भरा लो होली में गुब्बारों में मुस्कानें भर लो होली में कस कस सब पे मारो आज होली में भंग न पीओ मस्ती पीलो होली में उमंग के पकोड़े खा लो होली में जज़बातों की गुझिया तल लो होली में एक नहीं दो चार खिला लो होली में हाथों में विशवास लगा लो होली में मुख पर सबके खूब लगा लो होली में खुशहाली की हौदी भर लो होली में सभी ग़मों को धक्का मारो होली में कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें