सरक रहा है साल आहिस्ता आहिस्ता हसीं यादों का बांधे हुए गुलदस्ता नयी सोच ,नए रिश्तों से हुआ बाबस्ता कभी रूठा भी , पर गुज़रा हँसता हँसता