भाषा / Language
Aaj fir almora se loutne per ye sawaal man me goonj rahe ha…
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Aaj fir almora se loutne per ye sawaal man me goonj rahe hain. Rachna purani hai . Per kasak aaj bhi taaza hain.
यहाँ वहां के बीच ……… ऐसा क्यों है?
वहां इतना सुकून ,
यहाँ ऐसी हलचल क्यों है?
वहां मन ठहरा हुआ
यहाँ बेचैन ,मचलता क्यों है?
वहां दिन गुजरता ढलता सा,
यहाँ चुटकी में कटता क्यों है?
वहां छत पर चाँद -तारे बसते ,
यहाँ मेरी छत पर अजनबी बसेरा क्यों है ?
वहां बचपन खुला आँगन ,
यहाँ खिल्लोनों भरा बंद कमरा क्यों है ?
वहां यौवन घूँघट में खिला-खिला
यहाँ नक़ाब ओढ़े डरा - डरा क्यों है ?
वहां बादल पारदर्शी ,छूता हुआ
यहाँ धूएँ से विषेला क्यों है?
वहां पेड़ -पोंधे मुस्कुराते हरे भरे ,
यहाँ धूल से ढके,खड़े भर क्यों हैं ?
वहां हवा पानी ताज़े ,बहते हुए ,
यहाँ रुके से बदबूदार क्यों है?
वहां जीव- जंतु खुद आहार ढूंढ़ते ,
यहाँ मनुष्य की जूठन पर निर्भर क्यों है?
वहां दूर तक खेत-खलिहान हरियाली,
यहाँ बागवानी गमले में होती क्यों है?
वहां मन नहीं ,हर वस्तु निर्मल,
यहाँ सब नकली -मिलावटी क्यों है?
वहां ज़रुरत के हिसाब से आवश्यकता
यहाँ आवश्यकता से ज्यादा जरुरतें क्यों हैं?
वहां आधी रोटी में भी सुकून
यहाँ छलकती थाली भी न्यून क्यों है?
वहां थोडा कम भी अधिक,
यहाँ अत्यधिक-अपार भी कम क्यों है?
वहां सादी पोशाक, तन ढांके हुए
यहाँ चमकीले वस्त्र पर मनुष्य नग्न क्यों है?
वहां पाठ पूजा नित्य कर्म ,
यहाँ भगवन को दर्शन ,उलटी प्रथा क्यों है?
वहां बुढ़ापा आदरणीय ,घर की शोभा ,
यहाँ उपेक्षित ,घर के पहरेदार क्यों है?
वहां घर छोटे ,पर रिश्ते निभते हुए,
यहाँ बड़ा घर पर सब बिखरते क्यों है?
वहां दूसरों से कोई द्वन्द नहीं
यहाँ सारे प्रतिद्वन्दी क्यों है ?
वहां लोग अपनी जड़ों को पकडे हुए,
यहाँ जड़ें काटने को आतुर क्यों हैं?
वहां हर बंदा जाना -पहचाना सा,
यहाँ अजनबी,शातिर सा क्यों है?
वहां हर कोई खुली किताब सा सरल,
यहाँ व्यक्तित्व उलझा प्रश्न क्यों है?
वहां तिनका तिनका बचाओ कल के लिए ,
यहाँ बचाकर कहाँ छिपाऊं , तृष्णा क्यों है?
वहां समय और उम्र अपनी गति से गुजरते ,
यहाँ फिसलकर, उम्र से पहले बुढ़ापा क्यों है?
वहां इंसान फूंक कर , कदम रखता हुआ ,
यहाँ तेज़ रफ़्तार में मरता क्यों है?
वहां पारी पूरी कर आंखरी सांस लेता,
यहाँ चिंता ,बीमारी , काम के बोझ से घायल पारी अधूरी छोडता क्यों है?
वहां वह एक ही बार मरता,
यहाँ ,पल-पल मरता समझौता करता क्यों है ?
वहां जीवन शांत ,स्वेच्छा से भरा हुआ,
यहाँ हर पल प्रयत्नशील,मांगता सा,काटता सा लगता क्यों है?
यहाँ और वहां के बीच हम सब झूलते रहते हैं
हर बार वहां को लांघ कर यहाँ पहुँच जाते हैं
गुण वहां के गाते, मगर माला यहाँ की जपते हैं
सपना वहां का बुनते हैं ,साकार यहाँ करते हैं
हम भी पता नहीं ऐसे क्यूँ हैं?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें