कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0057

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यादों को छू रही हूँ

यादों को छू रही हूँ ..... तुझमें मैं हूँ ..........कहीं कहीं मुझमें सिर्फ तू .....मैं नहीं कहीं वादों को छू रही हूँ ..... तुझमें मैं हूँ .........हर कहीं मैं हूँ ही कहाँ ?.....जो तू नहीं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें