भाषा / Language
नाज़ुक सा है ये मुहब्बत का रिश्ता
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नाज़ुक सा है ये मुहब्बत का रिश्ता
भारी भरकम न एहसान रख
ओस की बूंदों सा है तेरा इश्क
अब बरस ,यूँ न परेशान रख
जज़्ब होकर एक बार देख मुझमें
संग सारी ख्वाइशें - अरमान रख
ज्यादा कुछ नहीं मांगती इश्क में
वक़्त मेरे लिए ,कायम जुबां रख
ज़िन्दगी खुशनुमा सफ़र है तुझ संग
बस तू इश्क हमारे दरम्यान रख
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें