भाषा / Language
गर थोड़े में ही मिल रहा सुकून है
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गर थोड़े में ही मिल रहा सुकून है
अर्श छूने की जिद्द अब ना पाली जायेगी
आस संग आंसूं मिला के भेजी है
इक यही अर्ज़ खुदा से ना टाली जायेगी
अदा से लद गए ,तेरा इश्क पहने बैठे हैं
आज ईद हमारी भी ना खाली जायेगी
इश्क से थकता नहीं ,स्याह हो रहा हूँ
फख्र है ,उफ़ अब भी ना निकाली जायेगी
बेइन्तेहाँ रुस्वाई कमाई है मैंने उम्र भर
इश्क पे अब कत्तई नज़र ना डाली जायेगी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें