कल्पनाशब्दों के बीच
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काश मेरे लिखे लफ़्ज़ों में वो स्पर्श आ जाये

काश मेरे लिखे लफ़्ज़ों में वो स्पर्श आ जाये अनमना भी पढता हुआ दिल तक सहर्ष आ जाये उड़ते एहसासों की बस कलम को दर्श आ जाए लिखूं जब भी कुछ ख़ास जमीं पे अर्श आ जाये
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें